Vipin Bansal 30 Mar 2023 ग़ज़ल प्यार-महोब्बत #निजात 93408 0 Hindi :: हिंदी
तक़लीफ़ ए ज़िंदगी से, निजात लेने आया हूँ !
नासूर ज़ख्मों पे, मरहम लगाने आया हूँ !!
मोहब्बतें तुम्हारी, धड़कने बन गई हैं !
मरहूम ए दिल को, धड़काने लाया हूँ !!
तक़लीफ़ ए ज़िंदगी से, निजात लेने आया हूँ !
नासूर ज़ख्मों पे, मरहम लगाने आया हूँ !!
शायर नहीं हूँ, न ही कवि हूँ !
न इल्म है, न लिखने का सलीका !!
गजलें पैमाने में, दर्द भरके लाया हूँ !
गजलें नस्ल कुछ, जुदा लेके आया हूँ !!
तक़लीफ़ ए ज़िंदगी से, निजात लेने आया हूँ !
नासूर ज़ख्मों पे, मरहम लगाने आया हूँ !!
रोशनी दिखाकें चिरागों ने लूटा !
तीरगी का दामन, अबतक न छुटा !!
मौत ए अँधियारा, मिटाने आया हूँ !
चिरागें मोहब्बत, जलाने आया हूँ !!
तक़लीफ़ ए ज़िंदगी से, निजात लेने आया हूँ !
नासूर ज़ख्मों पे, मरहम लगाने आया हूँ !!
उम्र हाथो से फिसल गई है !
अब की दुनिया उजड़ गई है !!
बाद की दुनिया, बसाने आया हूँ !
घर को अपने, सजाने आया हूँ !!
तक़लीफ़ ए ज़िंदगी से, निजात लेने आया हूँ !
नासूर ज़ख्मों पे, मरहम लगाने आया हूँ !!
मुफ़लिसी से कभी बाहर न आया !
पेट की दुनिया में, था मैं समाया !!
तालीम ए डिग्री भी न ले पाया !
गजलें खत में, जज़्बात लाया हूँ !!
तक़लीफ़ ए ज़िंदगी से, निजात लेने आया हूँ !
नासूर ज़ख्मों पे, मरहम लगाने आया हूँ !!
विपिन बंसल