ना वह समझे....
ना मैं कुछ उन्हें....समझा पाया...
वह गिरे शक की खाई में जाकर ऐसे
कि ना....मैं.....उन्हें उठा पाया....
बिखरते रहे ईट पर ईट शब्दों के
फ� read more >>
कौन करे इस मसले मे बात हमारे मन की
न दिन हमारे मन का न रात हमारे मन की
कुछ नही था ऐसा,सोच रखा था जैसा,ना
मेघ हमारे मन के न बरसात हमारे मन क read more >>