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Pravin Chaubey

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@ pravin-chaubey
, Maharashtra

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My Articles

कभी जो कंधे दुनिया उठाया करते थे, आज खुद सहारे की तलाश में रहते हैं। जो कदम बेफिक्र हवाओं में उड़ते थे, अब हर मोड़ पर ठहरने लगते हैं। आ� read more >>
कभी जो कंधे दुनिया उठाया करते थे, आज खुद सहारे की तलाश में रहते हैं। जो कदम बेफिक्र हवाओं में उड़ते थे, अब हर मोड़ पर ठहरने लगते हैं। आ� read more >>
कभी जो कंधे दुनिया उठाया करते थे, आज खुद सहारे की तलाश में रहते हैं। जो कदम बेफिक्र हवाओं में उड़ते थे, अब हर मोड़ पर ठहरने लगते हैं। आ� read more >>
गाँव – मेरी जड़ों की खुशबू नंगे पाँव वो पगडंडी, अब भी रुला देती है, जहाँ बचपन ने कंचों की दुनिया रची थी। वो कच्चे मकान की मिट्टी, जो हाथ� read more >>
गाँव की गलियाँ, वो बचपन की बातें, माँ की ममता, दादी की सौगातें। बिलकुल कच्ची पर दिल से पक्की, वो मिट्टी की खुशबू, वो अमर बेल की लच्छी। त� read more >>
वो मिट्टी की सौंधी ख़ुशबू, वो खेतों की राहें, जहाँ हर सुबह उम्मीदों की किरणें हैं चाहें। नदी के किनारे वो रेत की बिछौनी, जहाँ बचपन ने ल� read more >>
गाँव की पगडंडियाँ, बचपन की राहें, माटी की ख़ुशबू, खेतों की बाहें। पलाश के पेड़ों की छाँव निराली, सरसों के फूलों की चूनर मतवाली। चौपाल read more >>
फसलें लहराती थीं जिस आंगन में कभी, अब वहाँ ईंट-पत्थर के महल खड़े हैं, गाँव की गलियाँ मुझे अब भी बुलाती हैं, पर मैं मजबूरी के बोझ तले पड़े read more >>
"मिट्टी की सोंधी खुशबू में बसी है ज़िंदगी, गाँव के उस कुएँ में अब भी बचपन पड़ी है, शहर की रफ्तार में बहुत कुछ पाया मगर, जो अपनापन गाँव मे� read more >>
मै सफ़र अपना अब तन्हा गुजार लूंगा अपनी आंखो के आंसुवो को गिरने से पहले संभाल लूंगा जब तक जा है सरिर में, मैं उस की हां में हां भरता रहूं� read more >>
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