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Pravin Chaubey

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@ pravin-chaubey
, Maharashtra

I am the Restuarant Purchase Manager My hobby is writer

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My Articles

उसे के इंतजार में हम कब से अखिया लगाए बैठे है एक दिन होगी मुलाकात बस एक इसी सोच में हम दिल लगाए बैठे है बहुत दिखे मेने इस जहा में चाहने � read more >>
राहो में साथ उन के खड़े होकर हम जीने की वजह ढूढ रहे थे हमे क्या पता था वो मेरे बहाने किसी और को ढूढ रहे थे मेरी मजबूरियों तो उन का एक बहा� read more >>
मैं कोई सायर नही जो मै सायरी लिखता हु मुझे लिखने का शौक है शायद इस लिए मै लिखता हु लोग बातो को बनाते है हम हकीकत को दिखाते है ज्यादा फर� read more >>
सालो बाद जाके ऐसा लगा जैसे कोई खुशियों का पैगाम आया है मेरी खुशी में ही तेरी खुशी थी ऐसा तेरे जुबा पे मेरा नाम आया है इस कदर हम प्यार मे read more >>
ऐ जिंदगी और कितना सताएगी तू मांगी थी तुझसे बस एक छोटी सी खुशियां उस खुशियों के लिए और कितना रुलाएगी तू कभी खुदा के तो कभी तेरे दर पे गु� read more >>
कभी कभी ये एहसास होता है मानो जैसे कि कवियों के दिल में जलता हुआ कोई चिराग होता है जैसे अंधेरे में रोशनी की जरूरत होती हैं वैसे हर टू� read more >>
कभी कभी ये एहसास होता है मानो जैसे कि कभी कभी ये एहसास होता है मानो जैसे कि कवियों के दिल में जलता हुआ कोई चिराग होता है जैसे अंधेरे म read more >>
कभी कभी ये एहसास होता है मानो जैसे कि कवियों के दिल में जलता हुआ कोई चिराग होता है जैसे अंधेरे में रोशनी की जरूरत होती हैं वैसे हर टू� read more >>
आते आते आज किसी की यादें पिछे छोड़ आया हु कुछ बाते तो कुछ दिनो की मुलाकाते पीछे छोड़ आया हु किसी के चहरे की हंसी तो किसी के सपने तोड़ आय� read more >>
मैं अपनी एक दिन अलग पहचान छोड़ जाऊंगा जमाना क्या देखेगा हम को मैं जमाने को खुद दिखाऊंगा इम्तहान,सबर,बेबसी,लाचारी ये सब उस के सामने था read more >>
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