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राहो में साथ उन के खड़े होकर हम जीने की वजह ढूढ रहे थे

Pravin Chaubey 11 Apr 2023 शायरी प्यार-महोब्बत #कविता#काव्य#कवि#मोटीवेशन#ऑनलाइन सायरी #ऑनलाइन कविता#प्यार सायरी#दोस्ती सायरी# 33824 0 Hindi :: हिंदी

राहो में साथ उन के खड़े होकर हम जीने की वजह ढूढ रहे थे 
हमे क्या पता था  वो मेरे बहाने किसी और को ढूढ रहे थे
मेरी मजबूरियों तो उन का एक बहाना था 
उन को तो अपने नए सनम के घर जाना था 
इतना सजना सावरना देख के उनका मेरा दिल उन पर आना ही था ।      
हमे क्या पता था ये ऐसे ही उन्हें हम पर जुल्म ढाना था              - प्रवीण चौबे

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