Join Us:
दिशा-लाइव ग्रुप ने लॉन्च किया नया ब्रांड BizPry - लोकल से ग्लोबल तक 20 मई स्पेशल -इंटरनेट पर कविता कहानी और लेख लिखकर पैसे कमाएं - आपके लिए सबसे बढ़िया मौका साहित्य लाइव की वेबसाइट हुई और अधिक बेहतरीन और एडवांस साहित्य लाइव पर किसी भी तकनीकी सहयोग या अन्य समस्याओं के लिए सम्पर्क करें

मिट्टी की सोंधी खुशबू में बसी है ज़िंफसलें लहराती थीं जिस आंगन में कभी, अब वहाँ ईंट-पत्थर के महल खड़े हैं,दगी, गाँव के उस कुएँ में अब भी बचपन पड़ी है,

Pravin Chaubey 14 Feb 2025 शायरी देश-प्रेम #shayari#poitry#kavita# 19255 0 Hindi :: हिंदी

फसलें लहराती थीं जिस आंगन में कभी,
अब वहाँ ईंट-पत्थर के महल खड़े हैं,
गाँव की गलियाँ मुझे अब भी बुलाती हैं,
पर मैं मजबूरी के बोझ तले पड़े हैं।"

"नंगे पाँव जो दौड़ते थे खेतों की मेड़ों पर,
आज जूते पहनकर भी दर्द सहते हैं,
गाँव की मिट्टी में जो अपनापन था कभी,
वो शहर की भीड़ में कहीं खो गए हैं।"

"गाँव की चौपाल पर बैठकर जो किस्से सुनते थे,
शहर की खिड़कियों से अब वो आवाज़ नहीं आती,
वो छत पर तारों संग जो बातें करते थे,
अब मुँह छुपाकर चाँद भी निकल नहीं पाता।"

"सावन के झूले, वो आम के बाग़ान,
गाँव के किस्से, वो मिट्टी की जान,
शहर के बिस्तर पर चैन नहीं आता,
गाँव का वो खटिया का आराम।"

         -   प्रवीण चौबे

Comments & Reviews

Post a comment

Login to post a comment!

Related Articles

मेरे नजर के सामने तुम्हारे जैसे बहुत है यहीं एक तू ही हो , मोहब्बत करने के लिए यह जरूरी तो नहीं read more >>
मीठी-मीठी यादों को दिल मैं बसा लेना जब आऐ हमारी याद रोना मत हँस कर हमें अपने सपनों मैं बुला लेना read more >>
दोस्ती करो तो धोखा मत देना दोस्तों को आंसुओ का तोहफ़ा मत देना दिल से रोए कोई तुम्हे याद करके ऐसा किसी को मौका मत देना।। दोस्ती तो सिर� read more >>
Join Us: