Pravin Chaubey 15 Feb 2025 शायरी देश-प्रेम #poitry#shayari#kavita#poeam#kavy# 84821 0 Hindi :: हिंदी
गाँव की पगडंडियाँ, बचपन की राहें,
माटी की ख़ुशबू, खेतों की बाहें।
पलाश के पेड़ों की छाँव निराली,
सरसों के फूलों की चूनर मतवाली।
चौपाल पे बैठकर गप्पें लगाना,
सूरज ढले, फिर अलाव जलाना।
माँ के हाथों की रोटी, वो चटनी,
बाबा की बातें, वो नदिया सततनी।
न धन की हवस, न शोर शराबा,
मन का सुकून, बस प्यार ही प्यारा।
शहरों में ढूँढे जो सपनों का कोना,
गाँव की मिट्टी है असली बिछौना।
✍️ प्रवीण चौबे
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