Pravin Chaubey 15 Feb 2025 कविताएँ देश-प्रेम #poitry#shayari#poeam#kavita#gajal#kavy# 22426 0 Hindi :: हिंदी
वो मिट्टी की सौंधी ख़ुशबू, वो खेतों की राहें,
जहाँ हर सुबह उम्मीदों की किरणें हैं चाहें।
नदी के किनारे वो रेत की बिछौनी,
जहाँ बचपन ने लिखी थी अपनी ही कहानी।
आँगन में तुलसी, दीवारों पर छाँव,
कच्चे मकानों में भी बसता था गाँव।
सांझ ढले जब लालटेन जलती,
तो दादी की कहानियों में परियाँ मचलती।
हल की रेखाओं में सपने उगाते,
मेहनत की गीली ज़मीन पर फसलें लहराते।
गाय की घंटियों में संगीत बसा था,
चौपालों की हँसी में अपनापन रचा था।
शहरों में देखा बहुत भीड़ का मेला,
पर गाँव का सुकून नहीं कोई झमेला।
धन-दौलत से नहीं, प्यार से समृद्ध है,
मेरा गाँव ही असली स्वर्ग का चित्र है।
"बिछड़ गया हूँ शहर की गलियों में,
पर गाँव की यादें अब भी दिल में हैं।"
✍️ प्रवीण चौबे
I am the Restuarant Purchase Manager My hobby is writer...