हाथों में छाले, उदर में भूख ;
नेत्रों में निद्रा, नीर को आतुर कंठ चुका है सूख,
मजदूरी किसी का शौक है क्या?
घर का राशन, बच्चों की शिक्षा;
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हाथों में छाले, उदर में भूख ;
नेत्रों में निद्रा, नीर को आतुर कंठ चुका है सूख,
मजदूरी किसी का शौक है क्या?
घर का राशन, बच्चों की शिक्षा;
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दोस्ती रिश्ता नहीं एक एहसास है,
सारी दुनिया हो जाती है हमसे दूर, पर दोस्त हमेशा दिल के पास है।
ऐ दोस्त तू ही मेरे दिल की धड़कन, तू ही मेर� read more >>