Vaishnavi 09 Dec 2025 कविताएँ समाजिक #मजदूरी #समाज #सेवा #संघर्ष #मजदूर #क्रांति #जीवन #दुख #सरकार #प्रेम #राजनीति #labour #pain #मजबूरी #माया #life #struggles 10780 0 Hindi :: हिंदी
हाथों में छाले, उदर में भूख ; नेत्रों में निद्रा, नीर को आतुर कंठ चुका है सूख, मजदूरी किसी का शौक है क्या? घर का राशन, बच्चों की शिक्षा; पिता की बीमारी, और पत्नी की वो अधूरी इच्छा, मजदूरी किसी का शौक है क्या? भावों की शून्यता, टूटे से सपने; विश्राम की हूक, कुछ तो अरमान भी रहे होंगे अपने, मजदूरी किसी का शौक है क्या? मालिक की गाली, सुलगती सी काया; मृत्यु का ख़ौफ़, जीवन की उलझी सी माया, मजदूरी किसी का शौक है क्या? तपती सी धूप, अपनों की रंजिश; ग्रहों का दोष?, किस्मत की साज़िश? मजदूरी किसी का शौक है क्या??
Geogrpher at Indraprastha college for women, University of Delhi....