Anilkumar Rathwa (Sameer) 12 Dec 2025 कविताएँ समाजिक "जीवनपाठ" 10539 0 Hindi :: हिंदी
जीवन से बड़ा कोई विद्यालय नहीं, ये सिखाता दर्द भी, हिम्मत भी, ताल भी। हर सुबह नई लड़ाई, हर रात नया सबक, जो भागेगा इससे—वो रह जाएगा फँसकर। कठिनाइयों से बढ़कर कोई परीक्षा नहीं, ये तोड़ती हड्डियाँ नहीं—अंदर की कमजोरी सही। जो गिरकर उठे, वही असली खिलाड़ी, बाकी सिर्फ किस्मत के भरोसे बैठे बेचारी। समय—ये सबसे खतरनाक शिक्षक है, न आवाज, न शक्ल, पर असर विश्लेषक है। ये देर से भी मारता है, मगर मार गहरी, जो समझ जाए इसे—उसकी जीत फिर ठहरी। जीवन कहता है—“चल, गिर, लड़, फिर से बन!” कठिनाइयाँ कहती हैं—“तेरी हिम्मत कहाँ? दिखा ज़रा दम!” और समय फुसफुसाकर बोलता है— “जो आज टालता है, वो कल पछताकर रोता है…” इस गुरुकुल में जो तपेगा वही चमकेगा, जो रुकेगा वही थमेगा, और जो डटा रहेगा— वही इतिहास में अपना नाम दमकेगा। क्योंकि इस दुनिया में ना कोई राह आसान है, ना लड़ाई छोटी, जो आग में कूदेगा वो ही बनेगा मोती। तू डर मत, गिर मत, रुक मत— ये दर्द तेरी ढाल है, ये आँसू तेरी ताकत, और ये समय… तेरा सबसे बड़ा गुरु— जो तुझे हर ठोकर में आगे ही बढ़ाता है। तपकर निकल, चमककर निकल, अब तेरी जीत ही तेरी पहचान बनेगी— क्योंकि तू बना है उसी आग से जिससे तकदीरें बनती हैं।