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Vipin Bansal

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My Articles

ए शारदा माँ झूठ बोलने की मुझे कला दे दो ! भेद सके न जिसको सच,ऐसा मुझे कवच दे दो !! सच सुनने की अब, किसी को आदत नहीं । सच कहने की अब,जुबां में read more >>
कलम मेरी हो गई दिवानी कलम से मेरी आशिकी पुरानी दिले दर्दे गम को पीती हो जैसे जख्मों को शब्दों से सिती है ऐसे दिले मर्ज की दवा है निराल� read more >>
कलम में इतनी धार दे ! ऐ माँ शारदे,ऐ माँ शारदे !! कलम से निकले अलफाज ! वक्त ए हकीकत हो जाए !! बात में हो वजन इतना ! हर शब्द किताब हो जाए !! कलम मे� read more >>
कहीं थम गई सांसे कहीं कोई बर्बाद हुआ कहीं जीवन पूरा ठहर गया कहीं कोई आबाद हुआ !! कहीं मांग का सिंदूर मिटा कहीं आँखो का टूटा तारा कहीं � read more >>
तक़लीफ़ ए ज़िंदगी से, निजात लेने आया हूँ ! नासूर ज़ख्मों पे, मरहम लगाने आया हूँ !! मोहब्बतें तुम्हारी, धड़कने बन गई हैं ! मरहूम ए दिल को, धड़ read more >>
सपने दिखाकर हमको ! नींदो पे डाका डाला !! बातों की देके रोटी ! खा गए हमारी बोटी !! देखी है इनकी रहमत ! ऐसी है इनकी ख़िदमत !! लूट रही है देखो ! ब� read more >>
तीरगी मुबारक हमको ! तुम्हे रोशनी मुबारक !! शोहरते मुबारक तुमको ! हमे ठोकरे मुबारक !! तीरगी मुबारक हमको ! तुम्हे रोशनी मुबारक !! रोशनी स� read more >>
कहीं अश्क कहीं क्रंदन कहीं घर बने श्मशान! राबड़ी के राज में हुआ जंगल राज! कैसी यह हवा चली! कुम्हलाया है हर तरुण-कुचली है हर कली! बिखरे� read more >>
धरा का छीना श्चिंगार हमने अपनी जूबां के स्वाद की खातिर जीव जन्तुओ से छीना जीने का अधिकार हमने धरा को करा लहूलुहान हमने गंगा,जमना, न read more >>
गम से वाकिफ़,खुशी से अनजान हूँ ! जी रहा हूँ जिन्दगी से अनजान हूँ !! ये गम है तो हम है खुशी कि खुशी से निकलेगा दम है गम के सांये में जिन्द� read more >>
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