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Vipin Bansal

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My Articles

नियति का न कोंई तोड़ ! नियति जब खोले पोल !! हवस की गठरी भर नहीं पाए ! कर्म की लेखी मिट नहीं पाए !! कर्म के जैसे बीज लगाए ! फूट के वो ही बाहर आए read more >>
नफरत की फसल तुझको ! अब और न बोने देंगे !! इन हसीं वादियों को ! वीरां न होने देंगे !! तेरे नापाक मंसूबो को ! साकार न होने देंगे !! तेरी कठपुत� read more >>
सही को सही बताने में ! क्यों इतना हिचकिचाते हो !! गर उड़ान भरी विश्व गुरू की ! क्यों पर कतरना चाहते हो !! धारा 370 हटाकर ! नहीं हुआ महापाप !! read more >>
नेता जी की देखो ! क्या ग़ज़ब की बात !! जीतने से पहले सेवक ! जीतते ही सरताज !! नेता जी की देखो ! क्या ग़ज़ब की बात !! याचक बनकर घर-घर जाँए ! भि� read more >>
आगे बढ़ने की चाह ! और पीछे जा रहा है !! आदम से आदमी ! आदमी से सभ्य !! सभ्य से आदम ! हुआ जा रहा है !! आदम का यह कारवां ! चांद पर जा रहा है !! रफ़्� read more >>
उम्र के आख़िरी पड़ाव पर मुझे मिली पहचान है ! कोंई कहता कवि कोंई समझता शायर हम घर के कवि घर के ही शायर यह तुम्हारी मोहब्बतों की उड़ान ह� read more >>
महंगाई का अजगर रसोई को खा रहा है ! रसोई की थाली से स्वाद रफ़्ता - रफ़्ता गायब हुआ जा रहा है ! महंगाई का अजगर रसोई को खा रहा है ! पहले कोरो� read more >>
नक़ाब से ढ़का चेहरा ! हकीकत से जुदा चेहरा !! शराफत में छिपा चेहरा ! चेहरे पे नया चेहरा !! झूठी शान रंगा चेहरा ! सच से अब डरा चेहरा !! आडंबरो� read more >>
कवि की न तुम कल्पना ! शायर की न शायरी !! सूरज की न तुम किरणें ! चाँद का नूर नहीं !! आँखे देख सब भूल गई ! किस नूर का तुम नूर हो !! मधुशालाएं भी � read more >>
दिल में प्यार दरमियाँ दूरियाँ रख दी ! पाक रिस्तो के बीच मजबूरियाँ रख दी !! बात समझने के लिए कुछ, भी नहीं ! जिंदगी के तजुर्बो की खाईयाँ रख read more >>
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