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मारूफ आलम

मारूफ आलम

मारूफ आलम

@ maroof-aalam
, Uttar Pradesh

मारूफ आलम, शायर हैं जो गजल नज्म लिखते हैं विभिन्न बेबसाइट पर इनकी शायरी का प्रकाशन होता रहता है ये उत्तर प्रदेश के जिला रामपुर के छोटे से गाँव सनकरा के मूल निवासी हैं इन्होंने ग्रेजुएशन तक की पढ़ाई जिला रामपुर मे ही की है पोस्ट ग्रेजुएशन मुरादाबाद टी एम यू युनिवर्सिटी से किया है पत्रकारिता की पढ़ाई की है इनकी गजलें गूगल पर पढ़ी जा सकती हैं साथ ही इनकी ई पुस्तकें, सजायाफ्ता लोग,उजले शहर,कारवां वाले अमेजन. काम से डाउनलोड कर सकते हैं

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My Articles

गुनाहों की गौद मे पलता रहा इंसान सदी दर सदी यूहीं ढलता रहा इंसान मिट्टी के कीड़ों ने हड्डियां भी न छोड़ीं कब्र के अंधेरों मे गलता रह� read more >>
लापता काफिलों की एक कश्ती को किनारों से बचाकर लाए हैं बमुश्किल हस्ती को किनारों से बुनियादों के सिवा कुछ भी बाकी नही बचा था दरियाफ्� read more >>
कश्तियों के समुंदर मे उतर जाने के बाद काफिला पलटता नही गुजर जाने के बाद अपने गुनाहों की तौबा कर चुका हूँ अब मुश्किल है बिगड़ना सुधर ज read more >>
शेर की तरह बुंलद दहाड़ कर दो तुम पर्वत के सीने को दो फाड़ करदो तुम तूफान तिनको की तरह उड़ाने आएंगे जमा दो पैर,खुद को पहाड़ करदो तुम ज� read more >>
मुहब्बत के मारे हम वहाँ भी थे यहाँ भी हैं गर्दिशों के तारे हम वहाँ भी थे यहाँ भी हैं सोचते थे यहाँ तकदीर बदल जाएगी मगर किस्मत के हारे � read more >>
ना कुछ पाया ना कुछ खोया डगर मे ता उम्र चला दिवानों की तरह सफर मे मुड़कर उसने भी राहे सफर बांध लिया पलट कर जा चुका था मैं भी नगर मे छुपक� read more >>
मुद्दा कोई भी उछालो मगर एहतराम के साथ आसमां सर पे उठालो मगर एहतराम के साथ चलते भी रहो और सांस भी ना फूले ऐ दोस्त दौड़ने का हुनर पालो मग read more >>
ना मैं दर्पण हूँ ना ही तुम दर्पण हो ऐ दोस्त ना मै ईश्वर हूँ ना ही तुम अर्चन हो ऐ दोस्त प्यार वफ़ा इंसान और इंसानियत के प्रति ना मैं अर्� read more >>
सुबहों शाम हाथों को हसरत से मलते हो इसी वजह से तुम मेरे बजूद को खलते हो ना चिंगारी निकलती है ना आग जलती है चाहत मे तुम कितनी मुहब्बत से read more >>
उसकी भी जिंदगी थी पहचान थी ऐ दोस्त उसका भी अपना जहाँ था शान थी ऐ दोस्त जिसको खाया है तुमने बढ़े चाव से तलकर उस नन्हे मुन्ने परिंदे मे भ read more >>
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