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मारूफ आलम

मारूफ आलम

मारूफ आलम

@ maroof-aalam
, Uttar Pradesh

मारूफ आलम, शायर हैं जो गजल नज्म लिखते हैं विभिन्न बेबसाइट पर इनकी शायरी का प्रकाशन होता रहता है ये उत्तर प्रदेश के जिला रामपुर के छोटे से गाँव सनकरा के मूल निवासी हैं इन्होंने ग्रेजुएशन तक की पढ़ाई जिला रामपुर मे ही की है पोस्ट ग्रेजुएशन मुरादाबाद टी एम यू युनिवर्सिटी से किया है पत्रकारिता की पढ़ाई की है इनकी गजलें गूगल पर पढ़ी जा सकती हैं साथ ही इनकी ई पुस्तकें, सजायाफ्ता लोग,उजले शहर,कारवां वाले अमेजन. काम से डाउनलोड कर सकते हैं

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My Articles

भूखे भेड़िये हैं वो, खाने भी आयेंगे तुमको पेट जब भर जायेगा दुख जताने भी आयेंगे तुमको दोगला चरित्र है उनका विश्वास मे मत आना उनकी हद स� read more >>
टूटी हुई सड़के और टूटे हुए कांच जलते हुए मकान आग और ये आंच फिर से जुड़ जायेंगे,फिर से बन जायेंगे मगर कब तब जब फौंजे लौट जाऐंगी,जब फौंज� read more >>
हमने चलना नही छोड़ा बढ़ना नही छोड़ा छोड़ दिये रिश्ते नाते मेले ठेले मगर पढ़ना नही छोड़ा इस सफर मे बदला बहुत कुछ मगर कुछ जस का तस रहा � read more >>
तुम ये उम्मीद मत रखना मुझसे कि मैं धोखा नही दे सकता और ना ये उम्मीद रखना कि छल कपट से परे हूँ मैं मैं ये सबकुछ कर सकता हूँ धोखा भी दे सकत� read more >>
भले ही लिबास बदल लेना और पोंछ लेना खून से सना हुआ मुंह अपना भले ही चेहरे की सियाही को मैकप से छुपा लेना मगर जिस दिन तुम्हारे पाप कुरेद� read more >>
एक भीड़ आई असंख्यक लोगों की सब कुछ तबाह करते हुए खून की प्यासी बनकर,जोम्बी की तरह ऐसा लगता था वो नाराज थी किसी से किससे शायद नेताओं स� read more >>
तुम और तुम्हारे अवारा कुत्ते उपद्रव मचाए फिरते हैं गलियों मे काटते फिरते वेवजह इंसानों को छोड़ देते हैं वायरस उनके खून मे इस मकसद के read more >>
जिल्लतों से राब्ता करके इज्जतों का सफर करना क्या इसे ही कहते हैं मेरे दोस्त जिंदगी बसर करना ये क्या कम है बस्तियाँ फूंक दीं घर बार जल� read more >>
हजारों महानगर बसाये हैं हमने समुद्र की जमीनों पर कब्जा करके खेती के नाम पर पाट दिये खर्रे कब्जा लीं नदियाँ,रेत को सब्जा करके पानी तो � read more >>
तुम देते हो गाली तुर्कों को लेकिन जिक्र तक नही करते अंग्रेजों का,अपनी किताबों मे और तो और तुम्हारी वाट्सएप युनिवर्सिटी मे मुगलों की read more >>
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