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अशोक दीप

अशोक दीप

अशोक दीप

@ ashok-deep
, Rajasthan

नाम अशोक दीप पिता- श्री घीसा राम माता- श्रीमती दाखली देवी जन्मतिथि- 01-07-1978 शिक्षा- एम.ए., बी. एड लेखन भाषा- हिंदी व राजस्थानी काव्य संग्रह 1 ओ मेरी साँसों के दीप 2 क्यों आँसू लिखते रहते हो 3 नदी एक जो रेतां रलगी मधुमती, जगतीजोत, विकल्प, प्रेरणा, दृष्टिकोण, गवरजा, इंदौर समाचार, साहित्य दर्पण इत्यादि में निरंतर रचना प्रकाशन आकाशवाणी जयपुर से काव्यपाठ Read less

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जग को हँसना रास न आया । जग को यह स्वीकार कहाँ था ब्याहे जाएँ सपने मेरे छोड़ चन्द्रिका राजभवन को ले मेरे मंडप में फेरे करे उजाल� read more >>
आँगन मधुबन करते जाओ जाना है ? जाओ प्राण मगर बस इतना सा करते जाओ । साँसों के इस रीते घट में जीवन- अमृत भरते जाओ ।। जाने कल गाये कि न गाये read more >>
गीतिका जाने कैसी बात चली है । सहमी-सहमी बाग़ कली है । जिन्दा होती तो आजाती, सायद बुलबुल आग जली है । दुख का सूरज पीढ़ा तोड़े, सुख की म� read more >>
पाजाऊँ जो प्यार दीप का विष का प्याला हँसकर पीलूँ सहरा में भी खुलकर जीलूँ पाजाऊँ जो प्यार दीप का अँधियारी काली रातों में । बना सहेली read more >>
तो जग कितना सुंदर होता मेरी जमीं न मेरी होती और न तेरा अम्बर होता । जो कुछ होता अपना होता तो जग कितना सुंदर होता ।। मेरे मन के सपन read more >>
गाँव संदली रज-कंध पर फिर शीश धरना चाहता हूँ । खोलकर बाँहें युगल मैं गाँव भरना चाहता हूँ । एक अरसा हो गया है आँखभर देखे चमन को चाँद त� read more >>
गीतिका चिथड़े लिपटी हर इक मूरत, अंतर्मन तक खंडित है । बैठा है जो रजत सिंहासन, बस वह महिमा मंडित है । जाने कितने मेघ लिये वह, बरसे है मन read more >>
पग-पग आज दिवाली है हर ड्योढ़ी पर कलश सजे हैं द्वार-द्वार नव दीप जले हैं उतर गया है चाँद धरा पर यह रात बड़ी मतवाली है । पग-पग आज दिवाली है read more >>
जब साथ तुम्हारे रहता हूँ पीड़ामय संसार भुलाकर आँसू वाला भार गिराकर धीरे-धीरे प्रीत-धरा पर आजाद पवन-सा बहता हूँ । जब साथ तुम्हारे रहत� read more >>
बाँटी सबने मौत दान में महलों में भी रहकर देखा झोंपों में भी बसकर देखा जख्म हज़ारों दिए सभी ने पर चुम्बन एक न दे पाया । जब भी महका � read more >>

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