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Jeevan kumar
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Jeevan kumar
Jeevan kumar
Jeevan kumar
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, Rajasthan
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उलझन एक शिक्षक की।
उलझन में पढ़ा शिक्षक परीक्षा नजदीक आए, पाठ्यक्रम को समय नियम से पूरा न कर पाए, लगी छुट्टी अतिवृष्टि की बच्चे स्कूल भूल जाए, निकाल समय श
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‘‘तुम भूल न! जाना 26 मुझे’’
कहता पच्चीस - छब्बीस से, तुम भूल न जाना दोस्त मुझे, मुझसे किए वादे लोगो ने, प्रेम,प्यार भाईचारे से। में आया एक दिन! खुशी उल्लास लिए, जाऊ�
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अभिभावक की शिक्षक के प्रति सोच।
( शिक्षक/अभिभावक सोच) बात जब जून महीने की आए, अभिभावक विद्यालय को आए। कर! इकट्ठा एक कक्षा है बनाई, शिक्षक ने नई सोच रचाई। सहसा! शिक्षक
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बेटे का थोड़ा सा पापा पर ‘गुस्सा’
सुहावनी सी सुबह हुई थी , दोस्त का साथ था । दिन जन्म अष्टमी का था , भक्त में राधे का था । जन्म दिन बहुतों का था , किसी का तारीख से तो किसी क
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प्यार तिरंगा
मान तू ,अभिमान तू, तू ही हम सब का सम्मान है। देश विदेश में गूंजा रहे, ‘तिरंगा’ तेरा नाम है। जय जय जय हिंद का नारा, सदा करते तुझे ‘प्रणाम’
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में ‘गाय’ हूं।
अरे!रुको , सुनो में गाय हूं, बरसो तुम्हारे पूर्वजों ने पाला, में उसका अभिमान हूं, में गाय हूं , में गाय हूं। लोगह मुझे माता कहते हैं,
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जलो मत ज़हर खा लो।
अतिवृष्टि के कारण,कलक्टर अवकाश घोषित हुआ था। बंद पानी सोचा!..हमने ज्ञान का दीपक जला था। अरे!गाड़ी चली,साथ बाते चली, लोगों में साथ चर्�
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मटकी फोड़
सोचा! फोड़ दूंगा, मोड़ दूंगा, ‘मटकी’ को तोड़ दूंगा। की ‘कोशिश’ न टूट पाई, हुआ ‘मज़ाक’ बच्चों में छाई। मान ‘हार’ में बैठ गया, फिर भी ‘ख�
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स्कूल चलना है।
सभी बच्चों को उठना जल्दी है, 🌅हुआ सवेरा स्कूल चलना है। उठ ’नीलू’ जल्दी उठ जा तू, ’रामलाल’ को बुला कर ला तू। ‘ज्ञानोदय’ में �
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मित्रता ।
मित्रता मित्र रिश्ता भाई जैसा, रामलाल मित्र है कैसा। छठवीं कक्षा में हुई पढ़ाई, मुझसे आगे मित्र है भाई। देखन में वो छोटा लागे, उ�
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