Jeevan kumar 26 Aug 2025 आलेख समाजिक छोटी सी बात पर, बेटे और पिता के मध्य कलह हो जाना। 14799 0 Hindi :: हिंदी
सुहावनी सी सुबह हुई थी , दोस्त का साथ था । दिन जन्म अष्टमी का था , भक्त में राधे का था । जन्म दिन बहुतों का था , किसी का तारीख से तो किसी का तिथि से। उत्सव हमे मनाना था, ज्ञानोदय का सहारा था। सब चल रहा था ठीक , पर समय ऐसा आ पड़ा , हुई थी अनबन बाप ओर बेटे के बीच । में हुआ नाराज था सभी ने मुझे मनाया था, पर किसी से नहीं था समझा । मैने सोचा था दिन आज का खराब था , किसी ने मुझे कहा था समय वो खराब था। हुआ दिमाग जब शांत था दिल से मैने सोचा था, पिता थे वो मेरे कह मुझे वो सकते सब। आया शाम का वो समय था , गानों का वह राज था , जो रूह को छू जाता था । रात को मैने देखा दोस्तो कि वो महफिल थी , उसमें में बैठा था बाते दो संगीत की हुई फिर गेम का आनंद हुआ। गांव में मटकी फोड़ने का खेल था , लोगों में उत्साह था । मुझे आई नींद थी मैने इसे छोड़ा था , में चला अपने सपनों में।