एक सोच युवा पीढ़ी की - Sanju nirmohi

एक सोच युवा पीढ़ी की     Sanju nirmohi     आलेख     समाजिक     2021-09-22 11:28:48     lekh, kahani, sanjuNirmohi, vichar     104212        
एक सोच युवा पीढ़ी की

  हमारे देश में बहुत से महापुरुष हुए, बहुत से नेता हुए जिन्होने देश के लिये अपने प्राण तक न्यौछावर कर दिये, सिर्फ देश की एकता व अखण्डता के लिये।
भगत सिंह, सुखदेव,राजगुरू व और भी कई महापुरुष जिन्होने युवावस्था में ही अपने आप को राष्ट्र को समर्पित कर दिया व अपनी जान भी गंवाई ।
महात्मा गाँधी, सरदार पटेल, नेहरु जैसे कई नेताओं ने अपना समस्त जीवन राष्ट्र को समर्पित किया, डॉ. अंबेडकर ने  संविधान देकर देश को गणतंत्र बनाया।
ये था 1950 का भारत व तब के युवाओ की सोच, परंतु तब के भारतीय युवाओ व अब के युवाओ की सोच में बहुत अंतर है,  आज की युवा पीढ़ी राष्ट्र या राष्ट्रभक्ति के लिये सिर्फ भाषण या देशभक्ति की बाते ही करते है अमल नही। इस समय हर व्यक्ति ये ही आस लगाये रहता है कि हमारे लिये कोई नेता आये जो हमारा भला करे व हमारी समस्याओं का निपटारा करे, कोई ऐसा नायक आए जो हमारे लिये हर बुराईयों से लड़े, कोई भगत सिंह आये, कोई सरदार पटेल आये, कोई कलाम आये, कोई अंबेडकर आये । परंतु आज का युवा  ये नहीं चाहता कि हम खुद स्वयं को भगत सिंह जैसा युवा देशभक्त, चन्द्रशेखर जैसा स्वतंत्र, गाँधी जैसा अहिंसक, अंबेडकर जैसा संघर्षशील व कलाम जैसा ईमानदार व देशभक्त बनायें 
बल्कि हमने तो महापुरुषों को ही जातियों में बाँटा हुआ है जो कि बहुत शर्म की बात है । जबकि सभी महापुरुषो ने हमेशा सर्वसमाज की ही बात की है।
यदि देश का हर युवा, हर व्यक्ति स्वयं को महापुरुषो के बताये रास्ते पर चलने की प्रेरणा दे व बच्चों को भी देशभक्ति की शिक्षा दे तो हमारे देश में कभी कोई अपराध नहीं होगा कभी कोई जातिगत व धार्मिक लड़ाई नही होगी ।
हमारे देश का हर युवा अपना खाली  समय सिर्फ सोशल मिडिया पर ही बर्बाद  करने लगा है, अपने परिवार व समाज से भी दूर होता जा रहा है।  यदि कोई राष्ट्रिय पर्व रविवार का पड़ जाये तो हर व्यक्ति के मुख ये ही बात होती है कि हमारा एक अवकाश खराब हो गया । जबकि हमारा देश एक युवा देश है परंतु से युवा सोच नही। हमें चाहिये अपने कार्य व पढ़ाई के साथ साथ देशभक्ति व कानून का भी विशेष ध्यान रखे। आह्वान होने पर राष्ट्र का साथ दे, क्योंकि धर्म और जाति के लिये लड़ने से बेहतर है अपने देश के लिये लड़े । क्योंकि धर्म जाति से ऊपर उठकर हम सब भारतीय है। सभी महापुरुषों का सम्मान करे, उन्हें जातियों में न बाँटे ।
यदि ये बाते सिर्फ किताबों तक ही सीमित है तो इनका कोई औचित्य नहीं, ये सब बाते हमें अपने जीवन में अपनानी होंगी, तभी हमारा  देश विश्वगुरू कहलाएगा,
         ऐसी मेरी आशा है....धन्यवाद,

                                  - संजू निर्मोही

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