Jeevan kumar 26 Aug 2025 कविताएँ दुःखद गाय के ऊपर लिखी गई एक छोटी सी दुखद कविता। 15679 0 Hindi :: हिंदी
अरे!रुको , सुनो में गाय हूं,
बरसो तुम्हारे पूर्वजों ने पाला,
में उसका अभिमान हूं,
में गाय हूं , में गाय हूं।
लोगह मुझे माता कहते हैं,
पत्थर मार दूरह वो करते हैं,
मेंरी जग–जमीन ,
घर तुमने है बसाया,
में पास आऊ मुझे,
तुमने है भगाया ।
इतिहास में फिर दोहराऊंगी ,
तुम्हे याद में बार–बार आऊंगी,
जरा! थोड़ा सा रहम मुझ पर कर लेते,
अरे! थोड़ी सी जगह,तुम मुझे दे देते।
लेख:- जीवन कुमार