Jeevan kumar 15 Sep 2025 कविताएँ दुःखद विभाग द्वारा शिक्षक की शिकायत। 14588 0 Hindi :: हिंदी
( शिक्षक/अभिभावक सोच)
बात जब जून महीने की आए,
अभिभावक विद्यालय को आए।
कर! इकट्ठा एक कक्षा है बनाई,
शिक्षक ने नई सोच रचाई।
सहसा! शिक्षक सोच रहा,
पहाड़े ‘गिनती’ बुला रहा।
मन में अभिभावक देख रहा,
बच्चा ‘कछु’ ना सीख रहा।
कमी ‘निकालने’ स्कूल जो आए,
शिक्षक को वह ‘दस’ सुनाए।
अच्छा बच्चा ‘स्कूल’ जो रखा,
पढ़ाई में है क्यूं है कच्चा।
बोलो ‘शिक्षक’ क्या है पढ़ाया,
बच्चा कछु न बोल पाया।
मन ही मन ‘दमन’ जो करता,
शिकायतें सभी की सुनता।
घर शिक्षक के पास ‘गोली’ होती,
ज्ञान की रंगोली होती।
गर! इंसान हमेशा एक सा होता,
तो ‘मानस’ उनका अलग न होता।
शिक्षक बातें सुन रहा,
निरंतर ‘पढ़ाई’ चल रहा।
लेख:- जीवन कुमार