वो बचपन के भी क्या दिन थे
सब कुछ ठीक था वो दादा की छड़ी से खेलना दादी के चश्मे से खेलना सबकुछ ठीक था वो मम्मी की डांट खाना कितना अच्छा था स read more >>
" चिड़िया रानी"
चिड़िया रानी बड़ी सयानी
मोह माया सब इसने जानी
पंख फैलाए फुर हो जाती
यह कभी ना हाथ में आती
सुबह-सुबह यह जब है आती,
read more >>
लोहा आग में तपकर ;
लोहार की मार -
बनाता है मनोहर ,
इन्सान से होता है ;
इन्सानियत बढ़कर ,
जीवन की बेला ;
देख लो सच्चाई की -
पथ में चलकर ,
खुद को � read more >>