Ratan kirtaniya 30 Mar 2023 कविताएँ अन्य सत् राह बहुत कठिन होता है पर हमें सत् राह मे ही चलना चाहिए , इसलिए हमें अपने जीवन मे गुरु बना लेना चाहिए । 108430 0 Hindi :: हिंदी
लोहा आग में तपकर ;
लोहार की मार -
बनाता है मनोहर ,
इन्सान से होता है ;
इन्सानियत बढ़कर ,
जीवन की बेला ;
देख लो सच्चाई की -
पथ में चलकर ,
खुद को पा के अकेला !
भटक ना जाए ! तेरा पथ -
थाम ले गुरु कि हाथ ;
चल ले दो कदम गुरु के साथ ,
सोना बन के चमकना ;
माटी बनकर -
कुम्हार के हाथों में सजकर ,
खुद को आग में तापाकर ;
बेला है तेरे हाथ में -
सुधार जाओं सही दिशा में चलकर ।
चारु कर हिना को ;
शिला में घिसकर ,
जीवन को सँवार लो !
थोड़ा पसीना बहाकर ,
बनाने वाले जग को -
अद्भुत बनाया है ;
काटों वाली डाली पे -
पुष्प को खिलाया है ,
पुष्प खुशबू को छुपाकर -
फिर महकया है ,
भटक ना जाए -तेरा पथ ;
जगा ले उस शक्ति को -
तू ने जो तेरी अन्तर में छिपाया है ,
गुजर ले जीवन के दो पल -
सच्चाई के साथ।
नव तैर रहा है ;
अत्रु की सागर में ,
मसल गया सपनों की पुष्प ;
मत होना निराशा ;
मनस्थ हो अभिलाषा ,
बेला ने मारा ;
कौन देगा सहारा ,
परछाई भी होता विलुप्त ;
सृष्टि जब तिमिर में लिप्त ,
मत डर निशा में ;
चल तू सहीं दिशा में ,
आने वाला है !कोई पूरब दिशा में ।
बेला है अनमोल ;
तेरा मर्जी ! तेरे कर्म में तोल ,
तू क्योंं ! किस कारण ऐँठा है ?
पल -पल निकल गया !
व्यर्थ में क्यों ! बैठा है ?
सुन भाई - तेरा भविष्य !
वर्तमान की गर्भ में बैठा है ,
चल उठ -
इसे है अब गढ़ना ;
नहीं तो ! बाद मे पछतावा होगा वरना ।
ठोकर खा के ही -
सम्हाल जाना है ,
गिरके ही -
खड़ा होकर आगे बढ़ना है ;
संघर्ष तेरा जीवन है !
हार ना मानना है ;
तुझे आगे ही बढ़ना है ,
संघर्ष से हो कर्म फल अवांछित ;
काटोगे अब पुलकित -
सोच समझकर फसल तुझे बोना है ,
फैले तेरा समृद्धि दसों दिशा में ,
सच्चाई के साथ चल तू सही दिशा में ।
रतन किर्तनीया
मो* 9343698231