# महुआ के फूल ...
आदिवासियों का ,
है यह जीवन मूल
खिलने लगे हैं ,
अब महुआ के फूल ...
तपिश बड़ी ,
झुलसाती
नहीं कहीं ,
कोई छईआं...!
इस मौसम ,
टप - ट� read more >>
कविता और कवि ...
ये तो है ,
बिखरती चांदनी ,
गुनगुनाती रागनी ,
महकती बहती हवा ...!
किसी ने दर्द ,
किसी ने मरहम
किसी ने खुशी ,
किसी ने गम कहा ...!
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परी आज बहुत खुश थी और अंदर से थोड़ी घबराई हुई भी क्योंकि परी के कॉलेज का आज पहला दिन था!
परी आज पहली बार कहीं घर से बाहर जा रही थी वो भी इत� read more >>
सूखी हुई टहनी पर किसने...
ये सतरंगी फुल लगाया है!
जिसने भी इसको लगाया,
उसने बड़ा पुण्य कमाया है!!
जब तक सूखी पड़ी थी इस जमीन में,
तब तक इस� read more >>