यहां था कोहरा घना, मैं था अंधेरों से सना। तेरी जो धूप परी मुझ पे, मैं भी उजालों से बना। तेरी किरणों के फुहारों में, मन रोशनी से भींग गया। � read more >>
मेरे हृदय में तेरे धाम रे प्रियतमा !
हृदय में बस के -
निर्दयी तू हँस के ;
हृदय मेरा बिखर दिया -
करके चूर - चूर ,
हृदय की रूधिर बना अत्रुनीर ;
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है शाम का रंग!
है श्याम का रंग!!
दिल का मेरा प्यारा!
मेरा अपना काला रंग!!
नकारता सभी की सत्ता को!
विमुखता को व्यक्त ये करता है!!
प्र read more >>