Chinta netam " mind " 30 Mar 2023 कविताएँ अन्य 124953 0 Hindi :: हिंदी
# महुआ के फूल ...
आदिवासियों का ,
है यह जीवन मूल
खिलने लगे हैं ,
अब महुआ के फूल ...
तपिश बड़ी ,
झुलसाती
नहीं कहीं ,
कोई छईआं...!
इस मौसम ,
टप - टप
टप - टप ,
टपके महुआ ...!
रस भरे ,
मद भरे हैं
ये फूल ,
बड़ा ही नशीला ...!
गदराया है ,
इसका बदन
ये दिखता ,
बड़ा ही गदीला ...!
मयखाने की
ये शहजादी ,
मधुशाला की
मदमस्त जवानी ...!
बढ़ती इसकी ,
बेहद खूबसूरती
मिलता जब इसमें ,
बर्फीला पानी ....!
होंटो से लगाते,
रस तेरे मद भरे
कोई यहां पड़े ,
कोई वहां पड़े ...!
गरीबों का सुकून ,
अमीरों का जुनून
सर पर चढ़ी तो ,
सब अंधा कानून ...!
बनाने वाले ने तो ,
बना दिया इसे
किसने बदनाम किया ,
दोष दे किसे ...!
देखें तुझे जी ललचाए ,
क्या राजा और फकीरा
मादकता भरे तेरे हुस्न,
बनती तू है मंदिरा ...!
टप-टप टपके महुआ ,
ये फूल बड़ा ही नशीला
आग लगे तन-मन में ,
बन के उतरे जब मदिरा ...!
आदिवासियों का ,
है यह जीवन मूल
खिलने लगे हैं ,
अब महुआ के फूल ...
चिन्ता नेताम " मन "
डोंगरगांव (छ.ग.)