1. झीमिर झीमीर पानी गिरत हे
चारो मुड़ा मा कहर मचत हे
2. चुमुक ले अंधयारी समागे।
दिया बरत हे जुग जुग ले .
3.बिहनिया ले चिरई मन के शोर ।
जंगल � read more >>
सूर्य, दक्षिणायन हो गया है,
बारिश का भी, दौर खत्म हो रहा है।
फिर वही सर्दी भरे दिन, लौटने लगे हैं,
नए फूलों के दिन,फिर से महकने लगे हैं।
ख� read more >>
सतीश बचपन से बहुत सीधा लड़का था. माँ - बाप के संस्कार उसके व्यवहार और व्यक्तित्व मे झलकते थे. उसे सिखाया गया था कि हमें कभी किसी से झूठ नह read more >>
कितने अच्छे थे वे दिन
जीते थे चिंता के बिन..
खूब पढ़ना, खूब लिखना
मौज मस्ती, गिन -गिन -गिन
चलते फिरते थे बिंदास
रखते दिल में बड़ी सी आस
अ� read more >>