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Raj Ashok

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@ raj-ashok-singh-23
, Rajasthan

Jai jai ho

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कौन, सुबहाँ-सुबहाँ रोज जगा देती है। रात अन्घेरी को भगा देती है । सुबहाँ हो गई उठों ऊमीद की आवाज़ से सवेरे की रोशनी दिखा देती है।। रू� read more >>
कोई ऐसै कहे ... जैसे .....। हम ,रूठ गऐ ।। दिल कहे ं आके ,तेरी बाहों में , टुट गऐ ।.... हो........हो बिखरा हुआ । ये आसमान कब तक सितारो को ये छुपाऐगा । आ� read more >>
किसी गलत ,को सही साबित करने मै बर्षो लग जाते है लेकिन , किसी सही को गलत साबित करने के लिए चंद लम्हे काफी है। read more >>
हर सुबह में आता हूँ । तेरे चरणों में दीप जलाता हूं । मिट जाऐ अधंरे,, जीवन के तुझे मनाता हूँ। हर सुबह मे आता हूँ। हर मुश्किल मेरी, ये द� read more >>
आके तेरा दवार देखु माँ.......मे तेरा भवन मे पहली बार देखु माँ ...... मे तेरा भवन हो ,,,,आके... 2..2. तेरे भवन मे ऐसी, सुघी लगन हो गया। यहाँ मे read more >>
पेड़ों से गिरते पत्तों को देख अहसास हुआ। अभी मौसम पतझड़ का है। अभी वक्त सब्र का है । ये इन्तजार जरूरी है। ये इम्तिहान जरूरी हे। जब हा� read more >>
भ्रमित मन कि व्याकुलता , देख , सिय , हट जाना क्या ? अभी वनवासी है। मर्यादा ,पुरूषोत्म श्री राम देख, हर एक ,वचन, पर्णय का आज निभाना क्या ? read more >>
एक नज्ब एक सवाल पर कितने बिखर गए यहाँ, युहीं चलते रहे सिलसिले और लाखों मर गए , उलझने कम कहाँ हुई । जिन्दगी मे लौग इघर के ऊघर गए । read more >>
एक घुंट शराब ,ओर मेरे रंगी ख्वाब फिर बदले से दिल के हम नवाब, हु........2 अब देखो जरा, ये जानी-पहचानी सी कौन है। मेरी सुबहाँ की अंगडाई मे, मु� read more >>
इन तुफानों मै, हम किस कश्ती का सहारा ले के ये दरीयाँ पार हो जाऐ अभी तो बैठै किनारे पर आती - जाती कश्तियों देख रहे है। read more >>
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