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Raj Ashok

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@ raj-ashok-singh-23
, Rajasthan

Jai jai ho

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My Articles

हम, मुहोबत की, ऐसी ,..........,एक, दुनियाँ मे, तेरे संग आ गए है । हो वादे... प्यार के ..भी........ हम , न जाने कितने निभा गऐ .....। अब ,बदल ना अपना नूर .... तेरी read more >>
हम , दुनियाँ के, उन बेहतरीन खिलाड़ी मे से एक हँ । जो सारे दाँव हारने के बाद भी, जिन्दगी के खेल को जीतने का हुँनर रखते है। read more >>
मतलब, का ये खेल मेरे दाँव समझता है। ये दर्द भी अब मेरे घाव समझता हे। चोट कहाँ करनी है। पता, उन्हे जो मेरे हर -वार समझता है। खैर, उड़ते read more >>
पहली दफाँ जब मे डुबाँ,था,नीली आँखो के समुन्दर मे साँसे थम सी गई ,वक्त रूक सा गया । हवाऐ ठहर सी गई । बस, एक शांत , शुकुन भरी सह थी.... read more >>
समझदारी , तेरी ,जिम्मेदारी तेरी मुझे ना समझाँ, जीवन की उलझी पहली ये दो पल बस मेरी मस्ती के है। देख, बैकार,, यों मंसवरे ना दे read more >>
अक्सर, मुलाकातें दोस्त बना देती है। अजनबी, इन्सानो को , ये रिश्ते है।, जो चाहत की बुनियाद बनाते है। पहला सबक है ये इन्शानियत का read more >>
अपनाने लगे है। बदलते . रीति - रिवाज़ शौक . बदल के जीना क्या... ? यहाँ खुद ब खुद बदल गए सब, तौर तरीक़े अब,किसी से शर्माना क्या....? मत ढकिऐ, ओ� read more >>
आबरु, की तख्ती पे लिखे है। बेगुनाह ,भीड़ के गुनाह नासमझ , जमाने ने ,अफवाहो़ कि आँधी मे सच, को समझना भी जरूरी नहीं समझा । एक ,चाहत की चिं� read more >>
बादशाहों,या दूसरों के रहमों कर्म पर, या बुजदिल बन के जीने से अच्छा है। किसी रास्ते का पत्थर बन के जीओ । जब भी,किसी को ढोंकर लगेगी। दुआ� read more >>
मंत पुँछ, नशें मे, ... .. कैसे सालों तक मैं जीया ? हवा मे उड़ते छल्ले से ये घुंऐ के गुंबार किस्मत की बेरुखी , और अपनो के तानों ने ये नायाब श read more >>
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