क्षण भंगूर सा है ये मानुस,
दर्पण की तरह बिखर जाये,
मन मे ले जब दृढ- संकल्प,
हीरे की जैसे निखर जाये,
फिर भी ना जाने मुझे यहाँ,
भांति भांति � read more >>
ऐ- चांद तू सोच कितना खुशनशीब है,
आसमां में रहकर भी धरा के करीब है,
मैं लिख रहा हूँ मेरे कल्पित विचार मेरी लेखनी से,
तुझ से ही करवाचौथ, तुझ read more >>
कोई फिर से मेरा बचपन दिला दो,
वो कपड़े की गेंद, लाठी का बेट,
छोटी से मैदान में, टीमें हो जाती सेट,
वो भरपूर मजा क्रिकेट का दिला दो,
कोई फिर स read more >>
मत दिखा मुझे ये तेरी शोहरत के पन्ने,
उन्ही पन्नो की किताब हूँ मैं,
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तू सूंघ रही है जिन महुआ के फूलो को,
उन्ही से बनी शराब हूँ मैं,
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और तुझ read more >>
क्यू रोता है ऐ-नीर, यहां पंख निकलते ही परिंदे उड़ान भरते है,
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भनक लगी है तेरी खनक की उन्हें, तभी वे दरिंदे कान भरते है,
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और ये जो रिश्तो के � read more >>