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Rahul verma

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@ rahul-verma
, Rajasthan

Govt. Teacher

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My Articles

बिछड़ जाए गर आपकी आंखो से नींद कभी, तुम खुली आंखों का फायदा उठा कर देखो, बहानो में वक्त को यू व्यर्थ लुटाने से पहले, तुम बिगड़े मौसम को स read more >>
तू आसमां से गिर ज़मीं पर, या गिर ज़मीं से कुएं में, पर क्यू गिरता है नजरो से, तिरी इज्जत उड़ेगी घूंए में। तिरी बात का मुर्दा गढ़ जाएं, read more >>
क्षण भंगूर सा है ये मानुस, दर्पण की तरह बिखर जाये, मन मे ले जब दृढ- संकल्प, हीरे की जैसे निखर जाये, फिर भी ना जाने मुझे यहाँ, भांति भांति � read more >>
ऐ- चांद तू सोच कितना खुशनशीब है, आसमां में रहकर भी धरा के करीब है, मैं लिख रहा हूँ मेरे कल्पित विचार मेरी लेखनी से, तुझ से ही करवाचौथ, तुझ read more >>
कोई फिर से मेरा बचपन दिला दो, वो कपड़े की गेंद, लाठी का बेट, छोटी से मैदान में, टीमें हो जाती सेट, वो भरपूर मजा क्रिकेट का दिला दो, कोई फिर स read more >>
मत दिखा मुझे ये तेरी शोहरत के पन्ने, उन्ही पन्नो की किताब हूँ मैं, . तू सूंघ रही है जिन महुआ के फूलो को, उन्ही से बनी शराब हूँ मैं, . और तुझ read more >>
क्यू रोता है ऐ-नीर, यहां पंख निकलते ही परिंदे उड़ान भरते है, . भनक लगी है तेरी खनक की उन्हें, तभी वे दरिंदे कान भरते है, . और ये जो रिश्तो के � read more >>
रखना इस दोस्ती को बरकरार कुछ ऐसे, भले ही बन जाना सावन पर रहना आषाढ़ के जैसे, और ये जो हसीन चेहरे चमकते है अंधेरी रातो में, उनके लिए गुला� read more >>
नफरत है मुझे खुद के किरदार से; वहम की कोई दवा नही होती, वो कहती है कि मिट जाऊंगी तुझ पर; पर झुर्रियां कभी जवां नही होती, और जब चिल्लाती � read more >>
एकलव्यी बाण मारती थी वो मेघदूती बाण मार रही है तू, वो तो शिरीष का था फूल जो टूट गया झट से, अब टहनी जो बची है उसे भी तोड़ रही है तू। read more >>
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