Rahul verma 24 Jun 2024 कविताएँ समाजिक #कविता #मेहनत # 29690 1 5 Hindi :: हिंदी
बिछड़ जाए गर आपकी आंखो से नींद कभी, तुम खुली आंखों का फायदा उठा कर देखो, बहानो में वक्त को यू व्यर्थ लुटाने से पहले, तुम बिगड़े मौसम को सुहाना बनाकर देखो। हार जाते है कभी-कभी उस्ताज अपने जमाने के, तुम हार कर भी जीतने का जश्न मनाकर देखो, लोग उठाएंगे आप पर बार-बार उंगलियां अपनी, तुम उनकी हथेलियों से तालियां बजवाकर देखो। रईस बन जाते है लोग लक्ष्य से भटकते-भटकते भी, तुम ये रोना छोड़कर, मेहनत की राह अपनाकर देखो, बार बार टांग खींचने वाले ही मंजिल तक पहुंचा देंगे, बस तुम मंजिल की पहली सीढ़ी पर जाकर देखो। अ. राहुल वर्मा (नीर)
1 year ago