एक विद्यार्थी हुँ, और एक प्रतियोगी अध्यापक भी।जीवन मे जो दिखता है,जीवन मेरे साथ जो परिस्थितियों को देता है उसे ही साहित्यिक भाषा में लिखने को कोशिश करता हूं।
जो जारी है।।
मन बसने लगा अब ब्रज की गलियन में,
चित्त जाय लगा,मधुबन की बगियन में।
बस उस श्याम प्रिया से लगी है प्रीति मेरी,
रैन न कटै जगै अखियां, भोर भ� read more >>
कृतज्ञता कब तक ?
मै जब भी दानवीर कर्ण को पढ़ता, सुनता, किसी दृश्य साधन से उसकी जीवनी कहानियों को देखता तो कर्ण को बहुत कोशता l सारी गलती इस� read more >>