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मन बसने लगा।

Ajay kumar suraj 07 Oct 2024 कविताएँ अन्य #मन_बसने_लगा। #man_basane_laga 23227 0 Hindi :: हिंदी

मन बसने लगा अब ब्रज की गलियन में,
चित्त जाय लगा,मधुबन की बगियन में।
बस उस श्याम प्रिया से लगी है प्रीति मेरी,
रैन न कटै  जगै अखियां, भोर भई तेरी बतियन में।

अजय कुमार सूरज

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