Ajay kumar suraj 18 Dec 2024 आलेख दुःखद #तुम्हे_देखने_से_घिन्न_आती_है 31527 0 Hindi :: हिंदी
तुम्हें देख अब दिल में हलचल नहीं होती ।
निगांहों में स्थिरता का ठहराव नहीं ।
भावनाओं में मधुर छंद नहीं ,मिलने में उत्सुकता नहीं ।
ह्रदय में उमड़ता प्रेम नहीं , बाहों में कसाव नहीं ।
पैर छूने , झुकने रीढ़ में मुडाव नहीं ।
अब तुम्हें देख घिन्न आती है ,
तुम्हारे साथ रहने से असहज महसूस होता है ।
पास में हो तो भयानक डर सताता है ।
तुम्हे देखने मात्र से संदेह होता है ।
तुम्हे सुनने मात्र से मन खिन्न हो जाता है ।
जब से देखा है तुम्हे , वर्दी में - चंद रूपये के लिए , तुम्हारा जमींर गिरते हुए ।
तुम्हे गिरते हुए , तुम्हारी आत्मा बिकते हुए ।।
अजय कुमार 'सूरज'
नोट : हमारा उद्देश्य किसी की आत्मा को दुःख पहुचना नहीं है , यह लेख उनके लिए है जो अपने ईमान और धर्म , कर्तव्य को
कुछ पैसे के लिए भूल जाते है और किसी निर्दोष का अहित कर जाते है ।