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आकाश अगम

आकाश अगम

आकाश अगम

@ aakash-agm
, Uttar Pradesh

जीवन की इस आपाधापी में बिखरती जा रही श्वांसो को समेटने की कश्मकश में भरभराते कंठ से गुनगुनाता एक लड़का, जिसे लगता है कि जिस दिन पूरी तरह से कवि हो जाएगा, मर जाएगा वो और जी उठेगी उसकी मनुष्यता!

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My Articles

नेह से एकटक देख तुमको प्रिये मौन का गीत गा लूं अगर तुम कहो होंठ माथे पे रख कर के सांसों से मैं रूह को रंग लगा लूं अगर तुम कहो अपनी बाहो� read more >>
कब तक निहारूं तुम्हें मेरी लघुता का भान कराते इस आकाश में कब तक करूं महसूस तुम्हें मेरे आंसुओं को निर्ममता से मुझसे छीनने वाली, मुंह read more >>
इन हवाओं से मारे हुए दीप को प्रेम की लौ से प्रियतम जला दीजिए मेरी बेहोश आँखों को आँखों से ही मुक्ति की कोई मदिरा पिला दीजिए। नेह की read more >>
तुम्हें पता है? जब-जब देखता हूँ तुम्हें देखता हूँ एक उम्मीद के साथ कदाचित् अब हो जाए मुझे प्रेम मगर; तुमसे नहीं; स्वयं से! तुमसे प्रे read more >>
मेरी आँखें हैं पथराई, रीता हृदय कितना सूना है रस्ता तुम्हारा प्रिये यूं तो सारा जहां है हमारा मगर कितना मुश्किल है पाना सहारा प्र� read more >>
इन्हीं बातों से मन घबरा रहा है कोई अपना बिछड़ने जा रहा है। तेरे सँग बैठने का मन तो था पर मेरी वाली का सुन फ़ोन आ रहा है। वो बस हँसने की ख़ा read more >>
रो रो के जिये हैं आज तलक और कितना रोना बाक़ी है अच्छे के लिए होता है सब फिर कितना होना बाक़ी है। इस दुनिया में वो नीर कहाँ जो मन की प्यास read more >>
कई बार विभिन्न विद्वानों द्वारा उपदेशित किया जाता है कि व्यक्ति को एकांतवास करना चाहिए । इससे व्यक्ति के ज्ञान , बुद्धि , सद्गुण एवं म� read more >>
बर्फ़ वाला आ गया। अब गली में शोर होगा भौंपू भौंपू ज़ोर होगा लो, पकड़ ली ज़िद उन्होंने सभी बच्चे लगे रोने बालक और माता सभी का आज मन हर्षा ग� read more >>
शब्द या व्यक्ति से प्यार है चुन तो लो और फिर कुछ नियम कायदे बुन तो लो बाँस हूँ मैं या हूँ बाँसुरी , बाद में सोचना किन्तु पहले मुझे सु read more >>
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