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મને ચહેરા બદલવાનો કદી વ્યવહાર નથી ગમતો, દિલમાં ધુમ્મસ રાખી હોઠે ઉજાસ નથી ગમતો. સત્યની કિંમત ચુકવવી પડે તો પણ મંજૂર છે, જૂઠના સિક્કાથ� read more >>
[Intro] Oh, yeah... Midnight calling... Can you hear me? [Verse 1] I saw her standing underneath the neon light, A silver smile in the middle of the night. She said, “Come closer, I know your name,” But when I turned around, she vanished like a flame. A photograph was lying on the floor, A secret waiting behind a locked door. I h read more >>
बर्फ जैसी ठंडी आई सूर्य की किरणों को दूर भगाई आँधी जैसी तेज ठंडी हवाएं जिससे कांप रही है जनता सारी पापा मेरे परदेश गये हें वहाँ भी वो � read more >>
મસ્તક પોતાનું રાખીને, પરવશ બનીને માને નથી, સત્ય સામે આંખો હોવા છતાં, અંતરથી જાણે નથી. લોકપ્રવાહ જે દિશામાં વળે, એ દિશા સાચી ગણે, પોતાન� read more >>
[A0] Ha Get gone now Midnight on the move Ha ​[B1] Water pools on slick black stone Watch the shadow move alone Heavy clouds across the sky Watch the minutes slipping by Pacing fast without a sound Footsteps echoing all around Hustle down the narrow lane Feel the chill of falling rain Chasing something out of sight Deep inside the read more >>
સળગતા પ્રશ્નોની રાખે શહેર ઢાંક્યું છે, રાખ નીચે છતાં કોઈ અંગારો બાકી છે. સિંહાસનની છાયામાં માથાં ઘણાં નમ્યાં છે, અંધારા દરબારમાં એક read more >>
उस वक्त न टेलीविजन, न फोन हुआ करते थे| बचपन वो कुछ खास रहा होगा तुम खुद अंदाज लगा लो इस बात का, क्या क्या खास रहा होगा| चढ़ जाया करते थे बच� read more >>
मैला नहीं, किताब उठाओ दलित के घर पैदा होना कोई गुनाह नहीं है, गुनाह तो तब है जब सदियों से थोपा गया काम अपनी किस्मत मान लो। कब तक उठाते र read more >>
खामियां ढूंढने वाले तो हर हसीं चीज़ में खामी ढूंढ ही लेंगे, किसी की असली खूबसूरती जाननी हो अगर, तो उन आंखों से पूछो जो खामियों में भी ख� read more >>
[Intro – धीमी, गंभीर आवाज़] कितने सवाल दबे हैं, कितनी आवाज़ें थमी हैं… किसके हिस्से रोशनी है, किसके हिस्से कमी है? [Verse 1] सच बोलें तो दीवारें read more >>
“मुसीबत में की गई मदद और बाद में उसकी शिकायत, आपके नेक कर्म के फल को भी खट्टा बना देती है।” धन्यवाद read more >>
युद्धों के बेटे जब से बुद्धों के बीच उलझ गए कहां अखंड भारत हुआ करते थे हम कटक से अटक तक को भी तरस गए हाथ आए शत्रु को यूं ही जीवन दान नहीं read more >>
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