Aaditya singh 12 Sep 2026 कविताएँ अन्य ठंडी आई 4893 0 Hindi :: हिंदी
बर्फ जैसी ठंडी आई सूर्य की किरणों को दूर भगाई आँधी जैसी तेज ठंडी हवाएं जिससे कांप रही है जनता सारी पापा मेरे परदेश गये हें वहाँ भी वो चैन से नहीं सोये हें रंग-बिरंगी फूल सारी जिस पर बैठी मधुमक्खी रानी सुबह सबेरे ओस नहायीं घोर कुहासा को जब देखो देता कहीं कुछ न दिखाई ठंडी रानी रफ्तार बदली परहेज से रहना जनता सारी।