मैं तपती हुई रेत की प्यास हूँ...!
पर जब आँखों से छलकूं तो ,
ऐहसास ख़ास हूँ.....!
मैं गहरी नींद का सुकुन भी हूँ ,
और जागती आस भी....
टूटकर जो बिखर � read more >>
• जो मर गया अंदर मेरे
• वो जीना चाहता था
• जो दिखा ना सका और तुम्हारी नज़र भी ना गई
• उन सारे ज़ख्मों को खुद से वो सीना चाहता था
• बहुत च� read more >>
कद्र ना की जिसने वक़्त की आज
क्या वक़्त भी कल उसकी कद्र कर पायेगा
ये तो विधि का विधान है, इसे कौन बदल सकता है?
कि जैसा बीज बोएगा तू, वैसा ही � read more >>
सारा जहाँ झूमे वहाँ,
मस्ती मिले रहूँ तहाँ,
रंगों से लोटपोट हो जाएँ,
पास आओ ऐसे हम खो जाएँ ,
देखें जमाना हमको कभी ,
खोए रहे देख छूटे हँसी ,
� read more >>