डर मत मज़धार से तू, तैर के उसे पार कर
जीत होगा हौसले कि खुद को बुलंद कर
तुम ही तस्कार हो और चमत्कार भी
मत मांग उधर रोसनी रात कि अंधकार से
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रंग भी तू और नूर भी तू
धुप भी तू और छाँव भी तू
धरती और आकाश भी तू
चाँद भी तू चकोर भी तू
चचल और चित चोर भी तू
फूल भी तू कुसम भी तू
राग भी तू स� read more >>