Join Us:
दिशा-लाइव ग्रुप ने लॉन्च किया नया ब्रांड BizPry - लोकल से ग्लोबल तक 20 मई स्पेशल -इंटरनेट पर कविता कहानी और लेख लिखकर पैसे कमाएं - आपके लिए सबसे बढ़िया मौका साहित्य लाइव की वेबसाइट हुई और अधिक बेहतरीन और एडवांस साहित्य लाइव पर किसी भी तकनीकी सहयोग या अन्य समस्याओं के लिए सम्पर्क करें

Rupesh Singh Lostom

  • Followers:
    7
  • Following:
    7
  • Total Articles:
    275
Share on:

My Articles

अभी इंतज़ार तेरा बाकी है जो सकूँ दे सके मेरी आँखों को बो प्यास अभी बाकी है पूरा सहर खामोश है खामोसियों में तुझ से मिलने को आश अभी ब� read more >>
मैं ता ति था थी रा री का कि ना नि हमेशा मुझे कन्फुज करता करती है इसलिए मैं जब भी कुच्छ लिखता हूँ बिना भेद भाव किये मैं ति और ता का प्र read more >>
जब भी मैं देखता हूँ तुम्हे तो खुद को भी देख लेता हूँ पर ये क्या तेरी प्रतिमा और मेरा आकार तेरा चेहरा और मेरा ऐहसास गरम गरम सांसे और � read more >>
पत्नी जी ने आज बडा ही प्रेम से सोते से जगाया . अपने मधुर मधुर बानी से कहा . क्यो आज काम पर नही जाना है कमा के नही लाना है. कमाओ गे नही तो � read more >>
उल्झे है हम उल्झन मे सुल्झने का युक्ति नही उल्झन भि उल्झन जैसी सुल्झने का कोई उपायेनही ये उल्झे उल्झन से कब सुल्झेगे पता नही. अपन read more >>
पराए तो पराए थे कुछ अपने थे सो रुठ गये कुछ सपने थे सो टूट गये चुन चुन तिंका घर बनाया कुछ अँधियों में ठह गये और कुछ वारिस मे बह गये बक read more >>
बाते हि बातों में ऑफिस के कुछ कागज़ो को खंघाल रहा था कुछ को छाट तो कुछ को फाड़ रहा था बो एका एक आ गये मेरे आखों के सामने बातो ही बातो म� read more >>
तरह तरह के रंग है उसका और बहुरूपी रुप. वो है नैनी वो मिर्ग नैनी आखें है कटार. जुबा तेजधार छुरी बाते बरछी के बार. जब देखू मूड के मुझक read more >>
पहली बार जब मिला मैं उनसे आंख भी सरमाई थी सांसे थर थर कप रही थी धड़कन भी घवराई थी कहने को बहुत था उनसे पर हिमम्त ने धमकाए थे जज्बातो ने � read more >>
पत्थर को भगबान हो मानते. बोझ हो गए माँ बाप गिरगिट जैसे रंग हो बदलते ये कैसा बिस्तार रिश्ते नाते खूब निभाते नारी पे करता अत्याचार . घ� read more >>
Join Us: