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Rupesh Singh Lostom

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My Articles

शासन आज जैचंद चलता और प्रशासन परेत कानून के रखबाले ही नरभक्क्षी बन गए . और प्रजा चाट पटा अहार . चट कारे ले खा रहे नेता जी इंसान. लोकस read more >>
माँ जैसी कोई नहीं लोरी गा सुलाने बालि प्यार से खिलाने बालि सही राह दिखाने बालि बला दूर भगाने बालि हमारी गलतियों को माफ़ करने बलि अ� read more >>
ये बक्त नहीं है रुकने का समय नहीं है झुकने का ये काल के पुकार हैं अवसर नहीं हैं टूटने का मौका बनाओ चल पड़ो अभी फुरशत नहीं सोचने का का� read more >>
मैं भी तो आप के जैसा बस थोड़ा सा अधूरा नर नारी दोनों मैं मेरे पास भी दो ऑंखें दो हाथ दो पैर सूरत भी आप से मिलता फिर काहे तू भागे हम से read more >>
इश्क़बाज़ सुना हैं तू मुझ पे मरने लगी हैं मेरे ही नाम के माला जपने लगी ये हकीक़त हैं या कोई फ़साना तो नहीं सुना आज कल खूब तू सवरने लगी हैं read more >>
मैं सैनिक हूँ देश के रक्क्षक मैं सैनिक हूँ मैं देश की सुरक्क्षा करता हूँ सरहद के निगहबानी करता हूँ मेरे भी अपने हैं अपने भी कुछ सपने read more >>
अनुराग प्रेम भक्ति लिए शहर शहर भ्रमण करता हूँ करुणा त्याग परित्याग किए जन जन को राग सुनाता हूँ सह सहमति अभीष्ट सिद्धि से जो गरीबी � read more >>
तेरी तस्वीर आँखो में बसाये रखा हैं कुछ राज़ हैं जो सिने में दबाये रखा हैं फिर ये मत कहना कि बताया नहीं तेरी यादों को दुल्हन बनाये रखा ह read more >>
उसे भुलाना चाहता हु यादों से भी मिटाना चाहता हु पर ये कमवक़्त दिल हैं की उसे भूलता ही नहीं मैं तंग आगया उसे तनहा प्यार कर के आँखों मे read more >>
तू अब साँस बनके सांसो में घुलने लगा है तू बातों ही बांतों में हर बात पे रूठने लगा हैं आँखों से आँख आँख क्यों चुराने लगा हैं तू काहे क read more >>
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