संसार की माया मिथ्या, झूठ का ना मोल ।
अब ग्यान पटल खोल माँ, ग्यान पटल खोल ।।
अवगुण भरे हैं इस तन में, अब गुण की भाषा बोल ।
अब ग्यान पटल खोल � read more >>
क्यूँ ख़ुद से तू अंजान है, इच्छाओं में जकड़ा परेशान है।
क्यूँ चल रहा इन रास्तों पे, यहां न सुख समान है।
यहां न मन की मंज़िल, न अंतःकरण का गाँ read more >>