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यह किसी इतिहास का महल नहीं जो पुराना खंडहर हो जाएगा यह समुद्र का तूफान नहीं के सब बवंडर हो जाएगा ये कोई जिस्म या शरीर नहीं जो राख ख़ा read more >>
न कर्म का बंधन कोई, न अकर्म की दीवार हो, मिले जो सतगुरु के चरण, हम मृत्यु के उस पार हों। ​ये आना-जाना, जीना-मरना, खेल है इस 'भव' का बस, पकड़ ल� read more >>
जो तुमको सुननें लगे, मधुरिम अहद नाद‌। अंतर में कहने लगो, दाता अब तो जाग।। शरद भूषण मोंगरा read more >>
बीते रे दिन-ओ-रैन, गया क्षण-क्षण ये जीवन, आती-जाती सांस में, छुपा बैठा है राम। ​खोया रहा तू उम्र भर, इस माया-नगर में, देखा न दिल को चीर कर, ज read more >>
मरहम जैसे शब्द वो देख दूजे के ग़म दुख दर्द निकाल देता है। मुझे भीतर से मोम जैसा पिघाल देता है। मैं जब देखता हूं दर्द में डूबे किसी व� read more >>
ये जामा जो दिया मेरे मालिक का शुक्रिया। वो रहमत ना करता तो ये नर तन नहीं मिलता।। read more >>
सनातन सूत्र वेद, पुराण नमस्कार आज से हम आपके लिए लेकर आ रहे हैं एक ऐसा कार्यक्रम जो सवयं में समेटे हुए है सम्पूर्ण सनातन संस्कृति और � read more >>
भारतीय सनातन संस्कृति में समय को चार युगों में विभाजित किया गया है—सतयुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग और कलियुग। इन चारों युगों का वर्णन हम� read more >>
कलंदर यूं नहीं बनता कोई बिना मालिक की मर्जी के, कि हस्ती भूलनी होगी अगर मस्ती को पाना है। शरद भूषण मोंगरा read more >>
'गीत' "गंगे मां" गंगे मां गंगे मां गंगे मां सबको कर दिया है तूने धन्य मां गंगे मां गंगे मां गंगे मां छल छल से कल कल सी लहरें हैं शीतल स� read more >>
"बुद्ध बनूंगा" ज्ञानवान आत्म का स्वामी तपकर अंतर शुद्ध बनूंगा माता मैं भी बुद्ध बनूंगा घटा कोप इस कालखंड को चीर भोर का पुष्प खिलूंग read more >>
"रूह"मैं क्षणिक क्षण भुंगर नहीं मैं यथार्थ सत्य हूं किन्तु तुमको दीख ता जो मैं वही असत्य हूं' हूं चराचर में रमा क्या कोई मुझको जानता ह� read more >>
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