आज हवा का झोंका मदहोश है,
आ गले लग जा ऐ मेरी जिन्दगी।
आज न करना कोई बहाना ,
बरसात की बौछार बन मुझ पे बरस जा।
(स्वरचित मौलिक)
संदीप कुमार स� read more >>
प्रेम का बीज जैसे दबाया उधर
उनको दुख का समीकरण समझ आ गया।
नेह बन्धन बने, साथ चन्दन बने
मेरे सपने पर दुनिया का मन आ गया।
बात हम भी किये, ब� read more >>