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बादल गरज रहा है-मानसून बरस रही है

संदीप कुमार सिंह 29 Jun 2023 कविताएँ प्यार-महोब्बत मेरी यह कविता समाज हित में है। जिसे पढ़कर पाठक गण काफी रोमांचित होंगें 34728 0 Hindi :: हिंदी

बादल गरज रहा है,
मानसून बरस रही है।
प्यासी घटा तरस रही है,
ये दिल और हसने लगा है।
(स्वरचित मौलिक)
संदीप कुमार सिंह✍️
जिला:_समस्तीपुर(देवड़ा)बिहार

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