सुख की है अगर चाह, तो शरीर से ना कर दगा, गुटखा पान मसाला तंबाकू ना चबा, तंदुरुस्त को आता है, जीवन जीने का मजा, बीमारी है सजा, जीवन से उमंग खु� read more >>
...शब्द भेद का गुर जो-
लखे सहजे भवसागर तर जाए...
...सांस चक्कर में जीवन-
घुरत फ़िरे एक आवे एक जाए...
...देह-धाम,मन-मंदिर में-
रमता-राम सुरति चढ़ read more >>