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झूठी उम्मीदों को लेकर-आश लगाए बैठे थे
झूठी उम्मीदों को लेकर आश लगाए बैठे थे। हम उतने काबिल थे ही नहीं जितने की बताये बैठे थे। आधार तुम्हारे मन का था सहज भाव सा जीवन था अनु�
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प्रकृति का न्याय-काल का तीक्ष्ण नाद सुनाई देता है
प्रकृति का नर्तन जब आरंभ होता है! तब घुंघरु का मधुरिम स्वर नहीं काल का तीक्ष्ण नाद सुनाई देता है!! प्रेक्षा त्रिपाठी ✍️
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मनुष्य बड़ा अभिलाषी है-मनुष्य भूल जाता है
मनुष्य बड़ा अभिलाषी है भूल जाता है की आपका ही तो दIसी है पाँचों उंगली का माप सामान नहीं मन हर इंसान बल बुद्धि विदवान नहीं परंतु कर तो सब
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नित्य निरंतर-अदृश्य शक्ति करता है चमत्कार
नित्य निरंतर नील गगन में, पंछियों की चहकार! श्रेष्ठ जोधा ताज के सही हकदार का, जीवन भर करता इंतजार! कुशल व्यक्तित्व से व्यक्ति, का बनत
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परिंदा-परिंदों को देखो कहां ठहरता है जहां मन उसका
परिंदों को देखो कहां ठहरता है जहां मन उसका वहीं उड़ता है ऐ मन भी हमारा परिंदा है जानम इसे रोकना कहां हमारे हाथों में होता है धन्य�
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नादानी-मेरी नादानी को नासमझी मत समझ
मेरी नादानी को नासमझी मत समझ प्यार करती हूं तुझसे इसलिए हर बार तेरे बातों में आ जाती हूं मेरी बेकूफी को कमजोरी मत समझ क्योंकि अगर मैं
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कब समर्पित कर तुम्हें -कुछ पाऊंगी मैं
कब यह नेत्र आंसुओं से रिक्त होंगे क्या ह्रदय खुलकर कभी हंस पाऊंगी मैं। यह सृजन क्षण में नहीं होगा कभी मांगू अगर आकाश तो बादल ही पाऊंग�
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तुम गम ए हयात लेकर आओ- मैं पुरवा चांद बन जाऊं
तुम गम ए हयात लेकर आओ मैं पुरवा चांद बन जाऊं। तुम सघन दीपक जलाओ मैं बरसा आज बन जाऊं। सुधा चौधरी बस्ती
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जीत हमेशा अपनी हो- इस लिए दूसरों को झूठ के भ्रम से दूर रहने
दिल के अहसास बया होते है अगर बया होने दो जो भी कहा सही है अगर दुनिया उसे कुछ भी समझें हकीकत में जो सही है उसे सही रहने दो मगर..... ⭐***⭐***⭐***⭐***�
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जो तुम्हें दिल से चाहता है सनम-उसका दिल ना दुखाना कभी
जो तुम्हें दिल से चाहता है सनम उसका दिल ना दुखाना कभी मिलेंगे तुमको चाहने वाले हजार वैसा चाहने वाला मिलेगा ना कभी फरिश्ते बनकर आते �
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कलम की तागत को पहचान लूँ-माँ मुझको ऐसा वरदान दे
कलम की तागत को पहचान लूँ, माँ मुझको ऐसा वरदान दे। सपने अधूरे जो भी मेरे, पूरा करूँ उनको वरदान दे। कलम की तागत को पहचान लूँ, माँ मुझक�
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कहीं जो आंसू छलक जाए -उसको मेरा पता देना
कहीं जो नाम ले चाहत का कोई उसको मेरा पता देना कहीं जो आंसू छलक जाए उसको- मेरा पता देना। मैं हूं ऐसा नमाज ए इश्क देखना तुम भी कहीं जो गम स
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