ऐ- चांद तू सोच कितना खुशनशीब है,
आसमां में रहकर भी धरा के करीब है,
मैं लिख रहा हूँ
मेरे कल्पित विचार
मेरी लेखनी से,
तुझ से ही करवाचौथ,
तु� read more >>
अक्सर लोगों से सुना हैं जिंदगी चार दिन की होती है पर गलत कहते हैं क्योंकि जब ईश्वर का बुलावा आता है ना, तो जिंदगी कुछ सेकंड की हो जाती है� read more >>
लेख- अनुपम सूक्तियां।
लेखक- जितेन्द्र शर्मा।
08/05/2023
निवेदन- किसी रचना से कुछ ऐसा अमूल्य निकलता है जिसको संकलित करना कभी कभी बहुत उपयोग� read more >>
गीत बनता नहीं, बन जाता है!
लोगों के हृदय तक पहुंच जाता है!!
गीत गाया नहीं,लयता में ढल जाता हैं!
कभी-कभी करुणा में बह जाता है!!
तो कभी वीरता � read more >>
हर शब्द खेल दिखाते है!
कभी हसाता ते, कभी रुलाते,
तो कभी-कभी आत्मा को शांति पहुंचाते है!!
और क्या कहूं:-
यह शब्द ऐसे भी खेल खेलते हैं!
जो का� read more >>