जीना इसी का नाम है.........😃😃
मेघा एक सरकारी दफ्तर में टाइपिस्ट थी । उसके हाथों की उंगलियां जब कंप्यूटर के "की बोर्ड" पर नर्तन करत read more >>
कुछ दिन पहले कि बात है में अपनी छत की बालकनी पर बैठा था और पास से बच्चो को देख रहा था की वो कैसे हमारे बचपन की तरह खेल रहे तभी अचानक एक अलग read more >>
मन तो मन है, कैसे इसे टोकूं मैं ?
रो रहा है हर समां,
प्रिय कैसे आंसू रोकूं मैं ?
आना था,
मुन्ने के नामकरण जश्न में।
पहले ही आ गए,
लिपट तिरंग read more >>
ज़मीन पर यह चलते हैं !
आसमानी बातें करते हैं !!
अल्फाज़ो में रखते दम हैं !
बेशक नंग हैं !!
देश की शान हैं !
चाहे कितने ही बदनाम हैं !!
खुद्दा read more >>
प्रेम का तन से कैसा नाता !
प्रेम की है ये कैसी भाषा !!
प्रेम बिछोह है, प्रेम मिलन है !
प्रेम अगन है, प्रेम लगन है !!
प्रेम सुरों की इक धड़क� read more >>
गांव में बीते बचपन का , मुझे स्वप्न दिखाई देता है |
अपने गांव का वो प्यारा,मुझे द्रश्य दिखाई देता है ||
कांव -कांव कौवों की ,हमको सुबह सु� read more >>
*منقبت مرشد بر حق حضور معصوم ملت مفتی اعظم پیلی بھیت شریف*
زمانہ دیکھ لے رتبہ مرے معصوم ملت کا
ہے بجتا ہر طرف ڈنکا مرے معصوم ملت کا
خدا نے میرے مرشد کو ہے ایسا دبدبہ بخشا
بہت مشہور ہے ڈنڈا مرے � read more >>