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कितने मधुर थे समय के पंछी-जिनकी अब आवाज नहीं है

SHAHWAJ KHAN 10 Jun 2023 कविताएँ समाजिक कितने मधुर थे जीवन के वो पंछी, अपने , साज , सुर, आज, जीवन के पल 43959 2 5 Hindi :: हिंदी

कितने मधुर थे समय के पंछी जिनकी अब आवाज नहीं है

बिखर गये है सारे सुर अब तानों में साज नहीं है|

कुछ खोया है कुछ पाया है कुछ अपने अब साथ नहीं है   

बिता चुके जो जीवन के पल वो जीवन अब आज नहीं है|
 
                                                                                  ********* शहवाज खान*********

Comments & Reviews

Bhure
Bhure Bahut khoob

2 years ago

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Sudha Chaudhary
Sudha Chaudhary कितना सुन्दर

2 years ago

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